क्यों सोचते है हम अपने ढंग से.....


एक बार एक शराबी की शराब छुड़ाने के लिए उसके सामने एक गिलास में कुछ कीड़े डालकर उसमे शराब डाली गयी। फलस्वरूप उस गिलास के सारे कीड़े मर गए । इसके बाद उस शराबी से पूछा गया की बताओ तुमने इस प्रयोग से क्या सिखा तो उसने बताया की मैंने यह सीखा की शराब पीने से शरीर के सारे कीड़े मर जाते है। जबकि उसे सोचना यह चाहिए था की शराब पीना शरीर के हानिकारक है। कहने का मतलब यह है की हम हर बात को अपने ढंग से सोचते है भले ही हमारा वह पक्ष हानिकारक ही क्यों हो। हमें हमारी यह धारणा बदलनी होगी और वही पक्ष देखना होगा जो सभी के लिए हितकर हो अन्यथा हमारी यह कमी हमारे व्यक्तित्व के विकास में एक कांटासाबित हो सकती है।

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